Friday, 21 January 2011

एक माह बाद शीलू जेल से रिहा

दैनिक जागरण कानपुर, January 16, Sunday , 2011 
एक माह बाद शीलू जेल से रिहा
 बांदा, जागरण टीम : कोई कुछ भी समझे, लेकिन जुल्म सहने के बाद उल्टे जेल यातना भुगत रही शीलू के लिए रिहाई तो मुख्यमंत्री के जन्मदिन का रिटर्न गिफ्ट ही कहा जा सकता है। नरैनी विधायक के घर चोरी के आरोप में बंद शीलू आखिरकार जेल से ठीक एक माह बाद शनिवार को शाम 7.20 बजे रिहा हो गई। लेकिन वह रात्रि नौ बजे ही जेल के गेट से बाहर निकल सकी। क्योंकि उसे साथ ले जाने के लिए बाहर डटे कुछ संगठनों में खींचतान मची थी। उसके बाहर आने पर उमड़ी भीड़ ने युद्धविजेता की भांति उसका स्वागत किया। फूल-मालाओं की वर्षा हुई तो आतिशबाजी से आसमान सतरंगी हो उठा। कड़ी सुरक्षा में पुलिस अपने वाहन से शीलू को उसके गांव सहबाजपुर छोड़ने चली गई। विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी के घर चोरी के मामले में शीलू उसी 15 तारीख को ही रिहा हुई, जिस 15 तारीख को पिछले माह वह बंद हुई थी। शीलू की रिहाई के लिए सीबीसीआइडी ने रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने धारा 169 सीआरपीसी के तहत मुकदमा वापस लेने का प्रार्थना पत्र दिया था। जिस पर सुनवाई करने के बाद अदालत ने 20 हजार के निजी मुचलके पर शीलू को रिहा करने के आदेश दिये। मुख्यमंत्री का फरमान मिलते ही मामले की जांच कर रही सीबीसीआइडी के दो सदस्यीय दल इंस्पेक्टर अमर व विजय ने एपीओ राजेंद्र सहाय के साथ रिमांड मजिस्ट्रेट ओमवीर के सामने प्रार्थना पत्र दिया। जिसमें उन्होंने उल्लेख किया कि शीलू के ऊपर चोरी का मुकदमा नहीं बनता, लिहाजा उसकी रिहाई के आदेश दिये जायें। हमारे स्टेट ब्यूरो के अनुसार लखनऊ में शनिवार की सुबह सीबीसीआइडी की फाइनल ड्राफ्ट रिपोर्ट मिलते ही मुख्यमंत्री मायावती ने शीलू की रिहाई के आदेश दिये। उन्होंने कहा कि सीबीसीआइडी की जांच रिपोर्ट में शीलू पर लगाये गये आरोप सही नहीं पाये गये हैं। इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी। मुख्यमंत्री ने शीलू पर फर्जी आरोप लगाने वालों तथा चोरी का मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया है। उन्होंने प्रमुख सचिव गृह को पीडि़त शीलू को समुचित सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया। अपने जन्म दिन के मौके पर आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने शीलू प्रकरण में पहली बार सीधी टिप्पणी की। उन्होंने शीलू को निर्दोष बताते हुए कहा कि उनकी सरकार में सत्ता पक्ष अथवा विपक्ष के किसी भी व्यक्ति को कानून के साथ खिलवाड़ करने नहीं दिया जायेगा, चाहे वह कितना ही प्रभावशाली तथा शक्तिशाली क्यों न हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच में दोषी पाये जाने पर जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।बांदा में सुनवाई के दौरान विधायक के पुत्र मयंक के अधिवक्ताओं ने शीलू की रिहाई प्रार्थना पत्र का विरोध किया। रिमांड मजिस्ट्रेट द्वारा प्रार्थना पत्र पर कोई आदेश न दिये जाने के बाद मामला जनपद न्यायाधीश के पास पहुंचा। उनके हस्तक्षेप के बाद शाम करीब साढ़े छह बजे रिमांड मजिस्ट्रेट ने 20 हजार के निजी मुचलके पर शीलू की रिहाई के आदेश दिये। रात्रि में शीलू जेल से बाहर आ गई। उल्लेखनीय है कि नरैनी क्षेत्र के विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी के घर में शीलू के साथ 11 दिसंबर की रात सामूहिक दुराचार हुआ लेकिन 14 दिसंबर को उसके खिलाफ चोरी का कूटरचित मुकदमा दर्ज कराकर उसे जेल भेज दिया गया। शीलू ने जेल से आपबीती अदालत को भेजी। अदालत ने उचित कार्रवाई के लिए एसपी बांदा को शीलू का पत्र स्थानांतरित किया, लेकिन पत्र को अधूरा बताकर उन्होंने लौटा दिया। वे अनधिकृत रूप से जेल में शीलू पर बयान बदलने के लिए दबाव डालने पहुंचे। विपक्षी दलों ने हंगामा खड़ा कर दिया तो 1 जनवरी को मुख्यमंत्री ने इस मामले की जांच सीबीसीआइडी को सौंपी और 12 जनवरी को प्रारम्भिक जांच रिपोर्ट मिलने के बाद विधायक और उनके तीन सहयोगियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। इस मुकदमे की विवेचना की जिम्मेदारी सीबीसीआइडी को सौंपी गयी। 13 जनवरी को विधायक बांदा में गिरफ्तार कर लिये गये। हाईकोर्ट ने लिया स्वत:संज्ञान : इलाहाबाद : उधर आज दिन में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी शीलू प्रकरण का स्वत: संज्ञान लेते हुए शीलू को तत्काल प्रभाव से जेल से रिहा करने का निर्देश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति इम्तियाज मुर्तजा व न्यायमूर्ति एससी अग्रवाल की खंडपीठ ने दिया। न्यायालय ने जिला जज बांदा को चोरी की प्राथमिकी संबंधी केस स्पेशल मैसेंजर से सिविल जज (जूनियर डिवीजन)/सीजेएम बांदा को भेजने का निर्देश दिया है। अदालत ने सुनवाई की अगली तिथि 18 जनवरी पर चोरी संबंधी मामले की केस डायरी भी तलब की है।
जेल भेजने वाला दरोगा निलंबित
बांदा,जासं : चर्चित शीलू प्रकरण में चोरी का मुकदमा फर्जी साबित होने के बाद पुलिस अधीक्षक ने घटना के दिन अतर्रा थाने के प्रभारी रहे एसआई अब्दुल जब्बार को निलंबित कर दिया। अतर्रा थाने के वर्तमान प्रभारी शिवमिलन को भी वहां से हटा दिया गया। विधायक की गिरफ्तारी करने वाले फतेहगंज थानाध्यक्ष घनश्याम पांडेय को अतर्रा थाने का प्रभार सौंपा गया है। ध्यान रहे कि मुंसिफ कोर्ट परिसर में घनश्याम पांडेय ने ही शीलू द्वारा पत्रकारों की ओर फेंकी गई चिट्ठी फाड़ी थी। इस चिट्ठी में उसने अपने साथ हुए जुल्म का उल्लेख किया था। पुलिस अधीक्षक को शासन के सख्त रुख का शायद अब अहसास होना शुरू हुआ। शीलू प्रकरण पर पुलिस ने जो कुछ भी किया, सीबीसीआइडी ने पोल खोलकर रख दी है। अपने बचाव के लिए पुलिस अधीक्षक अनिल दास ने तत्काल चोरी की घटना के दिन अतर्रा थाने के प्रभारी रहे एसआई अब्दुल जब्बार को बिना तहकीकात के एफआईआर दर्ज करने के आरोप में निलंबित कर दिया। विधायक की गिरफ्तारी में मुख्य भूमिका निभाने वाले थानाध्यक्ष फतेहगंज घनश्याम पांडेय को थाना अतर्रा का प्रभार दे दिया गया। ध्यान रहे कि घनश्याम पांडेय ने मुंसिफ कोर्ट परिसर में शीलू की चिट्ठी फाड़ी थी, ताकि वह मीडिया के हाथ न लग सके। विधायक की गिरफ्तारी की योजना भी उनके ही आवास पर बैठकर बनाई थी। पांडेय ने शनिवार को पहुंच चार्ज भी ग्रहण कर लिया।
  

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