Wednesday, 12 January 2011

विधायक दोषी तो जेल क्यों नहीं ?

इस देश में भी अजीबो गरीब नियम और कानून है. सबके लिए अलग- अलग है. किसी लड़की को अगर आम आदमी हाथ भी छुआ दे तो उसे जेल तक की यात्रा करने वाले कानून विधायक को अभी तक कुछ भी नहीं बिगड़ सका है. बल्कि कानून का ही कुछ बिगाड़ा है. यह इस देश की स्वतंत्रता के दुरपयोग का ही तो नमूना है.

कोई एक अबला लड़की की आबरू भी लुटे और उसे ही अपने दिए गए मोबाइल की चोरी में गिरफ्तार भी करा दे. है न अजूबा. यह सी बी सी ई डी कह रही कोई हम नहीं. यह भी उसी सरकार की है जिसकी यहाँ पर सत्ता है. अगर थोड़ी भी गुन्जाईस होती तो यह विधायक कभी का बचाया जा चूका था. उत्तर प्रदेश के मायावती के इस शासन में भला लिसकी हिम्मत है जो बसपा के एक अदना से कार्यकर्त्ता को भी आँख दिखा दे, फिर पुरषोत्तम तो एक विधायक था. वैसे पुरषोत्तम को पुरषोत्तम कहना भी शर्मनाक है.देखिये आज सी बी सी ई डी के किये गए कार्यों को किस मुकाम पर समाचार पत्रों ने पहुँचाया है.

दैनिक जागरण January 12, Wednesday , 2011 
 शीलू प्रकरण में विधायक की होगी डीएनए जांच
 जागरण ब्यूरो : बांदा के शीलू प्रकरण में सीबीसीआइडी ने डीएनए जांच की तैयारी शुरू कर दी है। सहयोगियों समेत आरोपी विधायक जांच के दायरे में होगे। जांच टीम ने जेल जाकर घटना के दिन शीलू ने जो कपड़े पहने थे, उन्हें अपने कब्जे में ले लिया है। विपक्ष के आक्रामक रुख और आरोपी सत्तापक्ष का विधायक होने से जांच टीम फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। सूत्रों के मुताबिक विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी के घर काम करने वाले नौकरों, उनके परिवार की एक महिला और कुछ अन्य लोगों से बातचीत के बाद जांच टीम को दुराचार के पुष्टिकारक तथ्य मिले हैं लेकिन दुराचार में विधायक शामिल थे, इसका सबूत अभी तक सीबीसीआइडी नहीं जुटा पाई है। पुख्ता साक्ष्य के लिए ही डीएनए जांच कराने की बात हो रही है। अब तक जांच के निष्कर्षो से मौखिक तौर पर जब उच्चाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया तो उन्होने कहा कि जो लोग भी दोषी हों, उनके खिलाफ कार्रवाई हो। इसके बाद ही जांच टीम ऐसे सबूत की तलाश में है जिसे न्यायालय में प्रमाणिक साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। जेल में शीलू खून से लथपथ कपड़े पहनकर पहुंची थी। दूसरे दिन भी वह उन्हीं कपड़ों में थी। इस मुद्दे को उछालने वाले बांदा के विधायक विवेक सिंह जब जेल मे गए तो उसकी हालत देखकर नए कपड़े भिजवाए। यह भी चर्चा है कि सबूत मिटाने को शीलू के कपड़े धो दिये गये हैं। मालूम हो कि बांदा जिले के नरैनी विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी पर साथियों समेत शीलू नाम की लड़की के साथ सामूहिक दुराचार का आरोप है। आरोप यह भी है कि विधायक ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर दुराचार के बाद लड़की को चोरी के मामले में जेल भिजवा दिया। 75 से अधिक लोगों से पूछताछ के बाद मामले की जांच कर रही सीबीसीआइडी की दिशा स्पष्ट हो गयी है।

शीलू नाबालिग है या बालिग 17 को होगी सुनवाई
बांदा, नगर संवाददाता : मंगलवार को शीलू के बालिग या नाबालिग होने की सुनवाई सिविल जज जूनियर डिवीजन रवि गुप्ता की अदालत में हुई। पिता अच्छेलाल ने शपथ पत्र देकर कहा कि उसकी बेटी का जन्म 15 अगस्त के दूसरे दिन (17 अगस्त) 1994 को हुआ था, जबकि अभियोजन पक्ष से शीलू के कक्षा चार का अंक पत्र प्रस्तुत किया गया। जिसमें पांच फरवरी 1992 जन्मतिथि अंकित है। दोनों साक्ष्यों को पुष्ट करने के लिए अदालत ने 17 जनवरी को सहबाजपुर प्रा.वि. के प्रधानाध्यापक को छात्र पंजिका रजिस्टर व अन्य साक्ष्यों के साथ तलब किया है। अतर्रा मुंसिफ कोर्ट में चार जनवरी को शीलू की पेशी के दौरान उसके मुकदमे की पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने अदालत में अर्जी दी थी कि शीलू नाबालिग है। यह उसके पिता अच्छेलाल और भाई संतू का कथन है। इस पर अदालत ने शीलू के पिता को 7 जनवरी को कोर्ट में उपस्थित होकर साक्ष्य प्रस्तुत करने के आदेश दिये थे, लेकिन उक्त तिथि में अधिवक्ताओं द्वारा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किये गये। जिस पर न्यायालय ने 11 जनवरी की तिथि मुकर्रर की थी। शीलू के नाबालिग व बालिग होने की पूर्व घोषित तिथि पर मंगलवार को उसके पिता अच्छेलाल व मुकदमे की पैरवी कर रहे अधिवक्ता रामहित निषाद, सुरेश निषाद, गया प्रसाद निषाद सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालत में पेश हुए। अदालत ने अच्छेलाल से पूछा कि शीलू का जन्म कहां हुआ। इस पर उसने कहा कि उसकी बेटी का जन्म 15 अगस्त के दूसरे दिन (17 अगस्त) 1994 में हुआ। मुकदमे की पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने अच्छेलाल की ओर से शपथ पत्र दाखिल किया। जिस पर न्यायालय ने कहा कि शपथ पत्र की आवश्यकता नहीं रही। अदालत ने अपने आदेश में लिखा है कि अभियुक्त शीलू के अधिवक्ता ने उम्र से संबंधित कोई अभिलेख दाखिल नहीं किये हैं। अभियोजन पक्ष की तरफ से कहा गया है कि शीलू की जन्मतिथि 5 फरवरी 1992 है। अपना पक्ष सिद्ध करने के लिए उन्होंने शीलू के कक्षा चार का अंकपत्र व एसआर रजिस्टर की प्रमाणित छाया प्रति संलग्न की थी। न्यायाधीश ने पत्रावली में दाखिल टीसी की प्रमाणिकता को तस्दीक करने के लिए प्रधानाध्यापक को छात्र पंजिका रजिस्टर व सुसंगत अभिलेख सहित 17 जनवरी को न्यायालय में उपस्थित होने के आदेश दिये हैं। उक्त तिथि में सुनवाई के बाद ही तय हो सकता है कि शीलू बालिग है या फिर नाबालिग।

 एसपी ने अतर्रा थाने को भेजा कोर्ट का पत्र
 बांदा कार्यालय : कोर्ट में दिया गया शीलू का प्रार्थना पत्र पुलिस अधीक्षक ने अतर्रा थाने को कार्रवाई के लिए भेज दिया है। सूत्र बताते हैं कि पुलिस महकमा तभी कुछ कार्यवाही करेगा जब शासन से हरी झंडी मिल जायेगी। देर रात तक मुकदमा दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई। मालूम रहे कि सिविल जज जूनियर डिवीजन ने शीलू के पत्र को 10 जनवरी को जेल अधीक्षक को इस निर्देश के साथ भेजा था कि यह पत्र पुलिस अधीक्षक को कार्रवाई के लिए भेज दिया जाये। सूत्रों ने बताया कि एसपी ने शीलू द्वारा कोर्ट मे दिये गये पत्र को अतर्रा थाने में कार्रवाई के लिए भेज दिया है। शहर में देर शाम यह अफवाह फैली कि विधायक पर मुकदमा पंजीकृत हो गया है लेकिन अधिकारियों से बातचीत करने पर मुकदमें की पुष्टि नहीं हुयी। नाम न छापने के अनुरोध पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सीबीसीआईडी की रिपोर्ट के बाद ही कार्रवाई होगी। विधायक पर मुकदमा तभी पंजीकृत होगा जब शासन से हरी झंडी मिल जायेगी। अधिकारी यह भी कहते रहे कि सीबीसीआईडी की रिपोर्ट जब शासन को सौंप दी जायेगी तब कोई कार्रवाई होगी।
जेल में एसपी के आने की नहीं, सिर्फ जाने की है इंट्री बांदा : 29 दिसंबर को पुलिस अधीक्षक अनिल दास व क्षेत्राधिकारी अतर्रा राजेंद्र प्रसाद जेल में किस समय और किसलिये दाखिल हुये इसका जवाब जेल प्रशासन के पास भी नहीं है। गेट बुक में उनके जाने का समय दर्ज है, लेकिन वह जेल में किस समय दाखिल हुये यह रजिस्टर में कहीं भी अंकित नहीं है। इससे दोनों अधिकारियों के साथ जेल प्रशासन भी जांच के घेरे में फंस सकता है। जेल अधीक्षक ने सदर विधायक विवेक सिंह को गेट बुक में 29 दिसंबर को दिनभर जेल में आने-जाने वालों की सूची सौंपी है। इसमें शीलू प्रकरण की विवेचना कर रहे एसआई राधेश्याम शुक्ला के 13.35 बजे जेल में दाखिल होने व 18.47 बजे बाहर जाने की इंट्री है, लेकिन पुलिस अधीक्षक व क्षेत्राधिकारी के जाने का समय 18.47 बजे दर्ज है लेकिन जेल में दाखिल होने के समय का उल्लेख नहीं हैं।

हिंदुस्तान जनवरी 12 , 2011


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