Friday, 7 January 2011

बांदा के विधायक के खिलाफ कार्रवाई का आदेश

दानिक जागरण Jan 06, 12:34 am
बांदा के विधायक के खिलाफ कार्रवाई का आदेश

बांदा। शीलू प्रकरण में आरोपी नरैनी विधायक पर शिकंजा कसता जा रहा है। सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालत का आदेश जेल अधीक्षक ने कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक के पास भेज दिया है। उधर सीबीसीआइडी ने शीलू के भाई रज्जू से पूछताछ की तथा देर रात जेल में दस्तावेज खंगाले और अधिकारियों से पूछताछ की।
शीलू ने मंगलवार को सिविल जज जूनियर डिवीजन परवेज अख्तर को एक प्रार्थना पत्र दिया था। जिस पर यह आदेश था कि अभियुक्त शीलू ने अपने साथ अपराध होने की बात कही है। जेल अधीक्षक वीके सिंह ने बताया कि न्यायालय का आदेश पुलिस अधीक्षक को भेज दिया गया है। गुरु गोविंद सिंह जयंती के अवकाश के कारण शीलू की उम्र का मेडिकल परीक्षण बुधवार को नहीं हो पाया। शुक्रवार को कोर्ट में शीलू के बालिग या नाबालिग होने की सुनवाई होनी है। मेडिकल रिपोर्ट में नाबालिग साबित होने पर चोरी के आरोप में बंद शीलू का मुकदमा जिला न्यायालय में स्थानांतरित हो जायेगा।
सीबीसीआइडी ने नरैनी के विधायक पर लगे दुष्कर्म के आरोपों की जांच में कई लोगों से पूछताछ की। तीन घंटे तक जांच दल ने जहां दस्तावेजों को खंगाला वहीं दोपहर एक बजे से चार बजे तक शीलू के भाई संतू से गहन पूछताछ की। वीडियोग्राफी के साथ की गयी बातचीत में उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जहां जानकारी ली।
संतू से यह भी पूछा कि शीलू रज्जू के पास कैसे पहुंची और विधायक के घर से वह कितने समय और क्या सामान लेकर भागी। सीबीसीआईडी ने जेल में शीलू से मिलाई करने वाले व मिलने के लिए पर्ची लगाने वालों के बारे में भी जानकारी हासिल की।
च्च्चाई की राह रोक रहे तमाम सवाल
बांदा [लोकेश प्रताप सिंह]। उत्तर प्रदेश में नरैनी के बसपा विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी से जुड़ा बालिका दुष्कर्म प्रकरण पेंचीदगियों से भरा हुआ है। इसमें हर किरदार के अपने विरोधाभास हैं। यही कारण है कि मामले की पड़ताल में एक के बाद एक सवाल सामने आते जा रहे हैं, जिनका कोई संतोषजनक जवाब संबंधित लोगों के पास नहीं है। प्रकरण का पर्दाफास तभी संभव है, जब सवालों के सही जवाब सामने लाए जाएं।
बकौच् अच्छेलाल उनकी बेटी [दुष्कर्म का आरोप लगा रही लड़की] डेढ़ माह लापता रही, लेकिन इस दौरान उन्होंने थाने में गुमशुदगी की तहरीर क्यों नहीं दी। इस सवाल पर वह चुप्पी साध लेते हैं। जच् अच्छेलाल को पता चला कि बेटी को पथरा गांव में बंधक बनाकर रखा गया है, तो उन्होंने सूचना विधायक के साथ ही पुलिस को क्यों नहीं दी।
विधायक ने भी लड़की मुक्त कराने के लिए अपने गुर्गो को पथरा भेजने के बजाय पुलिस की मदद क्यों नहीं ली। अगर लड़की पथरा गांव में बंधक थी, तो मुक्त कराने के बाद रज्जू के खिलाफ मामला क्यों नहीं दर्ज कराया गया। विधायक ने लड़की को अपने घर रखने में क्यों रुचि दिखाई। विधायक ने घर की जिस गैलरी में लड़की को रहने की जगह दी, उनके बेडरूम का दरवाजा उसी गैलरी में खुलता है। जब विधायक का इतना बड़ा मकान है, तो लड़की को वहां क्यों रखा गया।
विधायक के घर पर निजी गारद भी तैनात रहती है, ऐसे में लड़की राइफल लेकर कैसे भाग गई। राइफल का जिक्र पुलिस को दी तहरीर में क्यों नहीं किया गया। हालांकि विधायक ने कहा कि जमा होने से बचाने के लिए ऐसा किया, जबकि बरामद मोबाइल, पांच हजार रुपए व कपड़े आदि पुलिस के पास जमा है, जिसे प्राप्त करने के लिए उन्होंने कोर्ट में अर्जी दे रखी है। गुरुवार को इसकी सुनवाई होनी है।
खुद विधायक ने बताया कि लड़की उनके घर से भी रज्जू से मोबाइल पर बात करती रही, तो ऐसी स्थिति में उनके परिवार के लोगों को उसकी नीयत शक क्यों नहीं हुआ और इसकी सूचना लड़की के पितच् अच्छेलाल को क्यों नहीं दी। डबल सिम वाले वाले जिस मोबाइल के चोरी किये जाने की बात कही जा रही है, विधायक का मोबाइल लड़की के हाथ कैसे लगा। अगर लड़की के रज्जू से कोई संबंध नहीं, तो उसने जेल में रज्जू के पिता गयादीन पटेल और मां सुंदरिया से मुलाकात क्यों की। लड़की के भाई संतू ने गिरफ्तारी के 13 दिन बाद 28 दिसंबर को क्यों जेल जाकर मुलाकात की। जबकि उसे मुलाकात पहले ही करनी चाहिए थी। खुद लड़की के पिता ने अब तक जेल जाकर अपनी बेटी से मुलाकात क्यों नहीं की। रज्जू ने अगर वाकई लड़की को बंधक बनाकर रखा होता, तो क्या उसके मां-बाप जेल जाकर उसी लड़की से मिलते। रज्जू खुद भी मिठाई व कपड़े लेकर मिलाई करने का बार-बार प्रयास करता।

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